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उत्तराखंड की वादियों में छुपे 4 अद्भुत बुग्याल-

उत्तराखंड की वादियों में छुपे 4 अद्भुत बुग्याल-
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उत्तराखंड की वादियों में छुपे 4 अद्भुत बुग्याल-

चारों ओर फैले हरे-भरे मैदान, ऊँचे-ऊँचे हिमालयी पर्वत और सर्दियों में बर्फ़ से ढकी वादियाँ – यदि आप भी ऐसी ही स्वप्निल जगह पर जाना चाहते हैं तो उत्तराखंड के बुग्याल (घास के मैदान) आपके लिए एकदम सही स्थान हैं। उत्तराखंड न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अद्भुत प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। बुग्याल न केवल अपनी सुंदरता के कारण आकर्षित करते हैं, बल्कि ये स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी अहम हिस्सा हैं। यहाँ के मैदान चरवाहों की जीवनशैली और पर्वतीय लोककथाओं से गहराई से जुड़े हुए हैं, जो इन्हें और भी खास बनाते हैं। 

उत्तराखंड के 4 सबसे अच्छे बुग्याल

बेदनी बुग्याल- 

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित  बेदनी बुग्याल  एशिया के सबसे खूबसूरत बुग्यालों में गिना जाता है। यहाँ से हिमालय की प्रसिद्ध चोटियाँ – त्रिशूल, नंदा घुंटी और चौखंबा साफ दिखाई देती हैं। गर्मियों में जब यहाँ जंगली फूल खिलते हैं तो पूरा मैदान किसी हरे कालीन पर रंगीन फूलों की चादर जैसा दिखता है। 

यहाँ स्थित बेदनी कुंड पवित्र झील मानी जाती है। मान्यता है कि यहाँ देवी नंदा का वास है। हर 12 साल में आयोजित होने वाली नंदा राजजात यात्रा इसी मार्ग से होकर गुजरती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और यात्री हिस्सा लेते हैं।

कैसे पहुँचें– दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 240–250 किमी है। बस, ट्रेन या हवाई मार्ग से जा सकते हैं| ऋषिकेश से कर्णप्रयाग/गोपेश्वर(लगभग 170 किमी/ 200 किमी) के लिए बस/कैब उपलब्ध होती है। वहाँ से आप लोहरजंग तक स्थानीय टैक्सी ले सकते हैं। लोहरजंग से आगे ट्रेक की शुरुआत होती है, जिसकी कुल दूरी लगभग 10–12 किमी है। यह ट्रेक सामान्य कठिनाई वाला है और इसे पूरा करने में लगभग 1 से 2 दिन का समय लगता है। रास्ते में घने जंगल, छोटे-छोटे गाँव और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य मिलते हैं, जो इस यात्रा को यादगार बना देते हैं।

घूमने का सही समय

गर्मी (मई–जून): मैदान हरे घास और फूलों से भर जाता है।
बरसात (जुलाई–सितंबर): यहाँ ट्रेकिंग कठिन हो जाती है।
सर्दी (अक्टूबर–नवंबर): बर्फ से ढका हुआ मैदान अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

बेदनी बुग्याल में पर्यटक कैंपिंग और फोटोग्राफी का आनंद ले सकते हैं, यहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है और साथ ही वे हिमालय की चोटियों को नज़दीक से निहारने का अनुभव भी कर सकते हैं।

दयारा बुग्याल

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं। यह बुग्याल अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, फैले हुए घास के मैदानों और हिमालय की ऊँची चोटियों के अप्रतिम नज़ारों के लिए प्रसिद्ध है। र्मियों में दयारा बुग्याल हरे-भरे घास और रंग-बिरंगे फूलों से ढका रहता है, जबकि सर्दियों में यह बर्फ़ की चादर ओढ़ लेता है और स्कीइंग का रोमांचक अनुभव कराता है। यहाँ से बंदरपूंछ, द्रोपदी का डांडा, श्रीकंठ और गंगोत्री पर्वत श्रृंखला के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं, जो इसे फोटोग्राफी और कैंपिंग के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं बनाते।

कैसे पहुँचें- दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 240–250 किमी है। बस, ट्रेन या हवाई मार्ग से जा सकते हैं| ऋषिकेश से उत्तरकाशी  (170–180 किमी ) के लिए बस/कैब उपलब्ध होती है। उत्तरकाशी से बारसू गाँव की दूरी लगभग 35–40 किमी है वहाँ से आप स्थानीय टैक्सी ले सकते हैं। यहाँ से ट्रेक की शुरुआत होती है और लगभग 8–9 किमी की पैदल यात्रा के बाद आप दयारा बुग्याल पहुँच सकते हैं।

घूमने का सही समय

गर्मी (मई–जून): जब बुग्याल हरी-भरी घास और फूलों से सजता है।
सर्दी (दिसंबर–फरवरी): स्कीइंग और बर्फ़ से ढकी वादियाँ देखने का बेहतरीन समय।
बरसात (जुलाई–अगस्त) में यहाँ आना मुश्किल होता है।

दयारा बुग्याल में  कैंपिंग और बोनफायर का आनंद ले सकते हैं, यहाँ से हिमालय की चोटियों के अद्भुत दृश्य, सूर्योदय और सूर्यास्त का रोमांच, स्कीइंग और स्नो ट्रेकिंग का अनुभव और बर्ड वॉचिंग एवं फोटोग्राफी का आनंद भी लिया जा सकता है।

कुआरी पास बुग्याल

कुआरी पास बुग्याल चमोली जिले में स्थित है, इसे “सपनों का मैदान” भी कहा जा सकता है, जहाँ हरे-भरे घास के मैदान, बर्फ़ से ढकी चोटियाँ और दूर-दूर तक फैले आकाश का दृश्य हर किसी का मन मोह लेता है।

कैसे पहुँचें- दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 240–250 किलोमीटर है। बस, ट्रेन या हवाई मार्ग से जा सकते हैं|  ऋषिकेश से पीपलकोटी   की दूरी लगभग  दूरी  220 किमी वहाँ से आप स्थानीय टैक्सी ले सकते हैं। पीपलकोटी से  ट्रेक की शुरुआत होती है- 

  • पीपलकोटी – गुलिंग टॉप से ​​ताली फ़ॉरेस्ट कैंप तक  दूरी: 5 किमी (2 दिन)
  • ताली वन शिविर से कुआरी दर्रे  दूरी: 6 किमी (3 दिन)
  • पीपलकोटी – गुलिंग टॉप  ट्रेक दूरी: 3 किमी (1 दिन)

घूमने का सही समय

गर्मी (मई–जून): सबसे हरा-भरा और सुंदर दृश्य।
सर्दी (अक्टूबर–नवंबर): बर्फ़ से ढकी वादियाँ, ठंडी हवाएँ और साफ़ आसमान।
बरसात (जुलाई–अगस्त): यह समय ट्रेक के लिए कठिन और खतरनाक हो सकता है।

कुआरी पास बुग्याल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य, बल्कि एडवेंचर, शांति और ट्रेकिंग का आदर्श संगम प्रस्तुत करता है। यह जगह उन यात्रियों के लिए है जो शहर की भीड़-भाड़ से दूर, हिमालय की गोद में समय बिताना चाहते हैं। चाहे आप फोटोग्राफी के शौकीन हों, रोमांचक ट्रेकिंग करना चाहते हों या बस प्रकृति की शांति महसूस करना चाहते हों

हर की दून घाटी-

हर की दून घाटी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं। यहाँ से स्वर्गारोहिणी, कालानाग और बंदरपूंछ जैसे पर्वत शिखरों के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं, साथ ही यह स्थान बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग, कैंपिंग, फोटोग्राफी और देवदार, भोजपत्र व जड़ी-बूटियों से भरे जंगलों के कारण बेहद लोकप्रिय है। इसे “घाटी ऑफ गॉड्स” भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व यात्रियों को आकर्षित करते हैं। 

कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्ग की ओर जा रहे थे तो उन्होंने इसी घाटी से होकर यात्रा की थी। इस कारण हर की दून को स्वर्ग का द्वार भी कहा जाता है।

कैसे पहुँचें– दिल्ली से ऋषिकेश आप बस, ट्रेन या हवाई मार्ग से आसानी से पहुँच सकते हैं। ऋषिकेश से सांकरी की दूरी लगभग 180 किमी है, जहाँ तक सड़क मार्ग से जाया जा सकता है। इसके बाद सांकरी से तालुका तक ड्राइव करनी होती है और फिर तालुका से गंगर गाँव तक ट्रेक की शुरुआत होती है।

  • गंगर गाँव से  सीमा (5 किमी ट्रेक) और  सीमा से ओसला (45 मिनट चढ़ाई) (दिन 2)
  • सीमा से बास्लो कैंपसाइट (9 किमी ट्रेक) (दिन 3)
  • बास्लो कैंपसाइट से  हर की दून घाटी (4 किमी) (दिन 4)

घूमने का सही समय

गर्मियाँ (अप्रैल से जून): फूलों और हरियाली से भरी घाटी देखने के लिए।
सर्दियाँ (अक्टूबर से मार्च): बर्फ़ से ढकी घाटी का अनुभव करने के लिए।

हर की दून घाटी केवल एक ट्रेकिंग डेस्टिनेशन ही नहीं, बल्कि यह आत्मा को सुकून देने वाली जगह है। बर्फ़ से ढकी चोटियाँ, मनमोहक सूर्योदय और शांत वातावरण इस यात्रा को अविस्मरणीय बना देते हैं। चाहे आप एडवेंचर के शौकीन हों, फोटोग्राफी करना पसंद करते हों या बस प्रकृति की शांति में समय बिताना चाहते हों – हर की दून का अनुभव जीवनभर आपके साथ रहेगा।

 मुन्स्यारी – उत्तराखंड का मिनी  कश्मीर 

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