सड़क मार्ग- दिल्ली से कानाताल की दूरी लगभग 320 किमी है। कार से यहाँ पहुँचने में करीब 8–9 घंटे लगते हैं। आप दिल्ली से देहरादून/ऋषिकेश तक बस से पहुँचकर आगे टैक्सी ले सकते हैं।
रेल मार्ग- सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन देहरादून (78 किमी) और ऋषिकेश (85 किमी) हैं।
हवाई मार्ग- सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट (देहरादून) है, जो कानाताल से लगभग 92 किमी दूर है।
घूमने का सही समय–
गर्मी (अप्रैल – जून): इस मौसम में यहाँ का तापमान बेहद सुहावना रहता है। चारों ओर फैली हरी-भरी वादियाँ और ठंडी हवाएँ सुकून का एहसास कराती हैं।
मानसून (जुलाई – सितम्बर): कनाताल की सुंदरता और भी बढ़ जाती है। प्रकृति प्रेमी हैं तो मानसून का नज़ारा आपको मंत्रमुग्ध कर देगा, लेकिन यात्रा थोड़ी चुनौतीपूर्ण।
सर्दी (नवंबर – फरवरी): सर्दियों में कनाताल की असली खूबसूरती देखने को मिलती है- बर्फ से ढकी वादियाँ और पहाड़।
कानाताल में घूमने की जगहें-
कोडिया जंगल-
एक बहुत ही सुंदर पिकनिक स्थल है। कनाताल से आप जीप सफारी या फिर लगभग 6 किमी की मध्यम स्तर की ट्रेकिंग कर सकते हैं, जो घने जंगलों से होकर गुजरती है। इस सफर में रास्ते भर आपको छोटे-छोटे प्राकृतिक झरने दिखाई देते हैं, जो बेहद मनमोहक लगते हैं। यह जगह फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग के लिए भी बेहद शानदार मानी जाती है।
कनाताल से मात्र 5 किमी दूर स्थित यह शक्तिपीठ माँ दुर्गा को समर्पित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 2 किमी का ट्रेक किया जा सकता है या फिर रोपवे का विकल्प भी उपलब्ध है। यह मंदिर 51 सिद्धपीठों में से एक है, जहाँ मान्यता है कि माता सती का सिर गिरा था। मंदिर परिसर चारों ओर से देवदार और रोंसली के पेड़ों से घिरा हुआ है, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है। यहाँ से पर्यटक देहरादून, चकराता, प्रतापनगर और चंद्रबदनी के अद्भुत नज़ारे देख सकते हैं।
कानाताल से करीब 35 किमी की दूरी पर एशिया का सबसे ऊँचा बाँध – टिहरी डैम है। टिहरी झील चारों ओर से पहाड़ों से घिरी हुई एक शांत और सुकून देने वाली जगह है। यह एक मानव निर्मित झील है, जो अपनी खूबसूरती और एडवेंचर गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर्यटक नौका विहार, जोर्बिंग, जेट स्पीड बोट राइड, हॉटडॉग राइड, वाटर स्कीइंग, बनाना बोट राइड, पैराग्लाइडिंग और बैंडवेगन बोट राइड जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
कनाताल में साहसिक गतिविधियाँ-
वैली क्रॉसिंग-
वैली क्रॉसिंग में एक मजबूत रस्सी के सहारे एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी की घाटी को पार करना होता है। प्रतिभागी सेफ़्टी हार्नेस और बेल्ट से बंधे होते हैं और रस्सी के सहारे खुद को खींचते हुए घाटी पार करते हैं। यह एक्टिविटी देखने और करने दोनों में ही बेहद रोमांचक होती है। यहाँ की वैली क्रॉसिंग लगभग 80–100 फीट ऊँचाई पर की जाती है और नीचे का अद्भुत प्राकृतिक नज़ारा इसे और भी यादगार बना देता है।
रॉक क्लाइम्बिंग-
प्राकृतिक चट्टानों और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ी ढलानों पर चढ़ाई करनी होती है। प्रशिक्षित गाइड्स की देखरेख में यह गतिविधि करवाई जाती है, जहाँ सुरक्षा के लिए हार्नेस, रस्सी और हेलमेट का इस्तेमाल होता है। चट्टानों पर चढ़ते हुए चारों ओर फैले घने जंगलों, घाटियों और बर्फ से ढकी चोटियों के नज़ारे देखने को मिलता है।
रैपलिंग-
कनाताल में रैपलिंग एक रोमांचक गतिविधि है, जिसमें आपको ऊँची और सीधी चट्टानों से रस्सी और सेफ़्टी इक्विपमेंट की मदद से नीचे उतरना होता है। प्रशिक्षित गाइड्स और मॉनिटर्स की देखरेख में इसे सुरक्षित तरीके से किया जाता है। जैसे ही आप धीरे-धीरे नीचे उतरते हैं, आसपास का प्राकृतिक नज़ारा आपके अनुभव को और भी रोमांचक बना देता है।
कैंपिंग-
कनाताल अपनी शांत वादियों और घने जंगलों के कारण कैंपिंग के लिए बेहतरीन जगह है। यहाँ आप तारों भरे आसमान के नीचे टेंट लगाकर रात गुज़ार सकते हैं और बोनफायर का मज़ा ले सकते हैं।
कनाताल उत्तराखंड की उन जगहों में से एक है जो प्रकृति, शांति और रोमांच का परफ़ेक्ट संगम प्रस्तुत करती है। यहाँ आने वाले यात्रियों को न सिर्फ़ हरे-भरे जंगलों और बर्फ से ढकी चोटियों का सुकून मिलता है, बल्कि रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव होता है।
चाहे आप परिवार के साथ शांतिपूर्ण वीकेंड बिताना चाहते हों या दोस्तों के साथ एडवेंचर ट्रिप पर निकलना, कनाताल हर मौसम और हर तरह के यात्री के लिए बेहतरीन विकल्प है।